Thursday, 27 October 2016

बोला नहीं, सिर्फ लिखकर दिया तीन तलाक




अंकित शर्मा, कानपुर : करीब पांच साल पहले निकाह हुआ और उसके सवा साल बाद ही शौहर की ओर से नोटिस
अंकित शर्मा, कानपुर :
करीब पांच साल पहले निकाह हुआ और उसके सवा साल बाद ही शौहर की ओर से नोटिस मिल गया। नोटिस में तीन तलाक लिखा था। तब से दर बदर की ठोकरें खा रहीं गजाला न्याय पाने को दौड़ रहीं। उसका यही सवाल है कि मुझे मेरे सामने तीन तलाक बोला ही नहीं गया तो तलाक कैसे हो गया। एक तरफ खुद के बुरे हालात तो साथ में बूढ़ी मां की जिम्मेदारी, गजाला हिम्मत के साथ संघर्ष में जुटी हैं। कुरआन व हदीस की रोशनी में उसका तलाक हुआ या नहीं, इसकी जानकारी के लिए मुफ्ती हजरात के पास भागदौड़ करते गजाला थक चुकी हैं, लेकिन हार नहीं मानी है। दो जून की रोटी के साथ जिदंगी के लिए लड़ाई लड़ते उसने अदालत की शरण ली है।
अपने पर बीती याद कर गजाला फफक पड़ी-'कोई किसी का नहीं होता। जिससे भ्ीा मैंने मदद मांगी, उसी की नीयत खराब हो गयी।' गजाला बताती हैं कि उनका निकाह कायस्थाना रोड निवासी आसिफ रहीम से 2 दिसंबर 2011 को हुआ था। आसिफ ने 11 मार्च 2013 को अधिवक्ता के माध्यम से एक नोटिस भेजा जिसमें कई आरोप लगाते हुए तीन तलाक लिख दिया। यह भी लिख दिया कि मेहर की रकम 25,000 रुपये व गुजारा भत्ता के 5000 रुपये भी दे दिए। इसके बाद लोगों के पास मदद के लिए दौड़ती रही लेकिन किसी ने मदद नहीं की। दुनिया की बुरी नजर से बचते हुए थक हार कर अदालत का सहारा लिया है।
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मजाक बन गया तलाक
गजाला का कहना है कि एक साथ तीन तलाक को मजाक बना दिया गया है। जब चाहते हैं तीन बार तलाक कहकर निकाल देते हैं। आखिर महिलाएं कहां जाएं। शरीयत में तीन तलाक देने का नियम है लेकिन तीन माह में दिया जाता है। इसका लोग गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। बकौल गजाला, उसके सामने तलाक नहीं दिया गया और इस्लामी कानून के मुताबिक न ही किसी गवाह के सामने तलाक हुआ।
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फोन पर भी तलाक दिया
गजाला के शौहर आसिफ रहीम का दावा है कि उन्होंने नोटिस भेजने से पहले टेलीफोन पर भी तीन बार तलाक दिया। शरई अदालत ने भी इसे मान लिया है। ऐसे में दहेज उत्पीड़न का मामला गजाला ने लगा रखा है जो अदालत में चल रहा है।

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